ब्रिटेन की सरकार को अपनी ही अदालत में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। लंदन की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि फिलिस्तीन समर्थक समूह ‘फिलिस्तीन एक्शन’ (Palestine Action) को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित करना पूरी तरह से गलत और गैरकानूनी था।
यह फैसला ऋषि सुनक की पिछली सरकार और मौजूदा प्रशासन की उन कोशिशों पर पानी फेरने जैसा है, जिसके तहत विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से कुचला जा रहा था।
आखिर मामला क्या था? ‘फिलिस्तीन एक्शन’ नाम का यह ग्रुप पिछले कुछ सालों से ब्रिटेन में काफी चर्चा में है। इनका मुख्य निशाना इजरायली हथियार कंपनी ‘एल्बिट सिस्टम्स’ (Elbit Systems) रही है। इस ग्रुप के कार्यकर्ता अक्सर एल्बिट की फैक्ट्रियों की छतों पर चढ़ जाते हैं, लाल रंग फेंकते हैं या खिड़कियां तोड़कर प्रोडक्शन बंद करवा देते हैं। इनका आरोप है कि यहाँ बनने वाले हथियारों का इस्तेमाल गाजा में आम नागरिकों के खिलाफ होता है।
ब्रिटेन के होम ऑफिस (गृह मंत्रालय) ने इन हरकतों से तंग आकर इस ग्रुप पर ‘टेररिज्म एक्ट 2000’ लगा दिया था। इसका मतलब था कि इस ग्रुप का सदस्य होना या इसका झंडा उठाना भी वैसा ही अपराध माना जाता, जैसे आईएसआईएस (ISIS) का समर्थन करना।
कोर्ट ने क्या कहा? शुक्रवार को आए फैसले में कोर्ट ने सरकार की दलीलें खारिज कर दीं। जज ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि “क्रिमिनल डैमेज” (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना) और “टेररिज्म” (आतंकवाद) में फर्क होता है।
कोर्ट का मानना था कि प्रदर्शनकारी अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए फैक्ट्री बंद करवा रहे थे, न कि जनता में खौफ पैदा करने या सरकार को गिराने के लिए बम धमाके कर रहे थे। जज ने सरकार के फैसले को ‘तर्कहीन’ (Irrational) करार दिया। यानी, आप सिर्फ इसलिए किसी को आतंकी नहीं कह सकते क्योंकि उनका प्रदर्शन आपको पसंद नहीं आ रहा है।
कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल कोर्ट के बाहर फिलिस्तीन एक्शन के समर्थकों ने इस फैसले को “सच्चाई की जीत” बताया। ग्रुप के एक सदस्य ने कहा, “सरकार हमें आतंकी का लेबल लगाकर डराना चाहती थी ताकि हम इजरायली हथियारों का विरोध बंद कर दें। लेकिन आज कोर्ट ने साबित कर दिया कि मानवाधिकारों के लिए लड़ना आतंकवाद नहीं है।”
सरकार के लिए बड़ा झटका कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ब्रिटेन की पुलिस और सरकार के लिए एक बड़ा सबक है। पिछले कुछ समय से ब्रिटेन में प्रदर्शन करने के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। ऐसे में कोर्ट का यह दखल यह बताता है कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को ‘आतंकवाद’ का नाम देकर दबाया नहीं जा सकता।
फिलहाल, सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है, लेकिन अभी के लिए ‘फिलिस्तीन एक्शन’ से आतंकी संगठन का ठप्पा हटा लिया गया है।
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