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आंकड़ों से पता चलता है कि रूस से मिलने वाला भारी डिस्काउंट अब घटकर केवल $16 प्रति टन रह गया है। वैश्विक बाजार में तेल की कम कीमतों के चलते, विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत बिना किसी बड़े वित्तीय नुकसान के अमेरिकी तेल की ओर रुख कर सकता है।