अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में सोमवार को बांग्लादेश में रह रहे हिंदू अल्पसंख्यकों के समर्थन में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ। हिंदू समुदाय के लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के बाहर इकट्ठा होकर बांग्लादेश में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वहां हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है और अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर अपनी चुप्पी तोड़े।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से वहां कट्टरपंथी ताकतें हावी हो गई हैं। मंदिरों में तोड़फोड़, घरों को लूटना और इस्कॉन (ISKCON) नेता चिन्मय दास जैसे धार्मिक गुरुओं की गिरफ्तारी ने दुनिया भर के हिंदुओं में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
वॉशिंगटन की सड़कों पर “न्याय चाहिए” और “अल्पसंख्यकों की रक्षा करो” जैसे नारे गूंजे। प्रदर्शन के आयोजकों ने बाइडन-हैरिस प्रशासन और भविष्य की ट्रंप सरकार, दोनों से अपील की है कि वे बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार पर दबाव बनाएं। उनका कहना है कि अगर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र जैसे संस्थान चुप रहे, तो यह स्थिति एक बड़े मानवीय संकट में बदल सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ जैसे संस्थानों को बांग्लादेश को दिए जाने वाले कर्ज को वहां के मानवाधिकारों की स्थिति से जोड़ना चाहिए। साथ ही, अमेरिकी कंपनियों से भी अपील की गई कि वे बांग्लादेश से कपड़ों का आयात तब तक रोक दें जब तक वहां हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।
प्रदर्शन के दौरान यह साफ संदेश दिया गया कि बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली तभी संभव है जब वहां रहने वाले अल्पसंख्यक सुरक्षित महसूस करें। वॉशिंगटन में हुई यह शांतिपूर्ण रैली अब दुनिया भर में रह रहे प्रवासियों के लिए एक मिसाल बन गई है, जो अपनी जड़ों और अपनों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
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